वीडियो में खाना दिखाने वाले जवान ने दिखाई ये चालाकी, हकीकत जान आप भी करने लगेंगे दावे पर शक!

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नई दिल्ली। बीएसएफ के जवान तेज बहादुर यादव के वीडियो के सामने आने के बाद देशभर में हलचल हो गई है। हर कोई सीमा पर खड़े जवानों के खाने को ठीक करने की मांग कर रहा है। गृह मंत्रालय मामले की जांच के आदेश दे चुका है। वहीं, बीएसएफ ने जो दावा किया है। उससे तेज बहादुर के आरोपों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

न सभी बातों के बीच न्यूज 18 इंडिया ने जवान तेज बहादुर के आरोपों की पोल खोल दी है। वायरल हुए वीडियो में तेज बहादुर दाल के बारे में बता रहा है। बार-बार कह रहा है कि दाल में हल्दी और नमक के अलावा कुछ नहीं है, लेकिन इस वीडियो को दोबारा ध्यान से देखने पर आपकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी। इस वीडियो में जब तेज बहादुर पूछता है कि क्या बना है, तो आवाज आती है मटर बना है। वीडियो में दाल के बगल में कीमा-मटर रखा हुआ है, लेकिन तेज़ बहादुर ने वीडियो में कीमा मटर के बारे में कुछ भी नहीं कहा और बड़ी सफ़ाई से इसे छुपा लिया।

तेज बहादुर ने खाने के अलावा नाश्ते का भी वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उसने दिखाया है कि जवानों को चाय और पराठे के सिवा कुछ नहीं दिया जा रहा है। उसमें वो कहता है कि ये जले हुए पराठे हैं सिर्फ़ और चाय का गिलास, और कुछ नहीं, न अचार, न जैम न बटर, कुछ नहीं, ये है जवानों का नाश्ता। अब आप बताइये कि क्या ये खाना खाकर जवान ड्यूटी कर सकते हैं?

तेज बहादुर अपने वीडियो में नाश्ता और खाना दोनों की शिकायत कर रहा है। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद जब बीएसएफ के अफसर जवाब देने आए तो उन्होंने बताया कि ये 6 जनवरी को ही बीएसएफ के डीआईजी ने बटालियन का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने तेज बहादुर से भी बात की थी। जवानों से खाने के बारे में भी पूछा गया था। लेकिन, उस वक्त तेज बहादुर ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी।

बीएसएफ के मुताबिक तेज बहादुर पहले भी कई बार अनुशासनहीनता कर चुका है। उसपर अपने वरिष्ठ साथी पर बंदूक तानने का आरोप है। साथ ही उसके सेवाकाल के रिकॉर्ड में चार बार अनुचित काम करने का भी मामला दर्ज है। वो कई बार बिना छुट्टी लिए ड्य़ूटी से नदारद भी रह चुका है। 2010 में उसका कोर्ट मार्शल हुआ, लेकिन नौकरी से निकालने के बजाए कम सजा देकर छोड़ दिया गया। उसके इसी सर्विस रिकॉर्ड की वजह से अब तक प्रमोशन नहीं मिला।

बीएसएफ के इन दावों के बारे में न्यूज 18 इंडिया ने तेज बहादुर से बात की तो उसने भी इन आरोपों की सही बताया। लेकिन, उसका कहना है कि इसके साथ ही उसे कई पुरस्कार भी मिले हैं जिनका जिक्र बीएसएफ नहीं कर रही है। बीएसएफ और तेज बहादुर के अपने अपने दावे है, लेकिन इसके साथ ही एक हैरान करने वाली सच्चाई भी है।

बीएसएफ के अफसरों ने बताया कि तेज बहादुर ने स्वेच्छा से रिटायरमेंट यानी वीआरएस के लिए अर्जी दी थी। जिसे स्वीकार किया जा चुका है और वो 31 जनवरी से रिटायर हो रहा था। उसे कुछ जवानों के छुट्टी पर जाने की वजह से 28 दिसंबर को ही बटालियन में भेजा गया था।

तेज बहादुर ने अपने वीडियो में दाल के बगल रखे कीमा-मटर का जिक्र नहीं किया। इससे वीडियो बनाने को लेकर उसकी नीयत पर शक जरूर होता है। साथ ही रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले उसने जिस तरह के आरोप लगाए हैं उससे उसके दावों पर भी सवाल खड़े होते हैं, लेकिन ये भी सच्चाई है कि तेज बहादुर के आरोप संगीन है। इसलिए इसकी जांच के बाद हकीकत भी सामने आनी चाहिए।

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